Tuesday, May 19, 2015

केंद्र सरकार और यूपी सरकार द्वारा समाज के बंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए चलायी गयी योजनाओं और घोषणाओं की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगाती आरटीआई : यूपी आईपीएस में आरक्षित वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के कम प्रतिनिधित्व से कटघरे में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी

यूपी में आईपीएस के स्वीकृत पदों में से 25% से भी अधिक खाली: 13%पदों पर
अनुसूचित जाति, 4%पर अनुसूचित जनजाति, 19% पर पिछड़ा वर्ग के अधिकारी
कार्यरत. : 64% पद भरे हैं अनारक्षित श्रेणी से :कुल 94% पदों पर काबिज
हिंदू अधिकारी: महज 3% पदों पर कार्यरत हैं गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक: महज
3% पदों पर कार्यरत मुस्लिम.समाज के बंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाने
को चलायी गयी योजनाओं की सफलता पर प्रश्नचिन्ह.

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http://upcpri.blogspot.in/2015/05/blog-post_19.html

पर्यटकों और उत्तर प्रदेश के वाशिंदों को यहाँ की बदहाल
'क़ानून-व्यवस्था' एक प्रमुख समस्या और सर्वाधिक संवेदनशील मुद्दा हो
सकता है पर लगता है भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ऐसा नहीं मानती.
शायद यही कारण है कि आवादी के हिसाब से देश के सर्वाधिक बड़े और क़ानून
व्यवस्था के मामले में बदहाल इस सूबे में अखिल भारतीय पुलिस सेवा (
आईपीएस ) के स्वीकृत पदों में से 25% से भी अधिक पद खाली हैं. यह हाल तो
तब है जब इस देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी,गृहमंत्री राजनाथ सिंह
समेत लगभग 73 सांसद इसी सूबे से चुनाव जीतकर संसद में पंहुचे हैं. मेरा
मानना है कि नियत से कम अधिकारी कार्यरत होने से एक कुछ अधिकारियों को एक
से अधिक पदों के दायित्व देने पड़ते हैं जिसके कारण जबाबदेही का निर्धारण
करना असहज हो जाता है और इसकी दुष्परिणती बदहाल क़ानून व्यवस्था के रूप
में सामने आता है और सूबे की जनता सीधे-सीधे प्रतिकूल प्रभावित होती है.


यूपी में पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा मुझे दी गयी सूचना के अनुसार
यूपीआईपीएस केडर के स्वीकृत पदों की कुल संख्या 517 है जिसमे से महज 386
पद ही भरे हैं और 131 पद खाली हैं. जनसूचना अधिकारी तनूजा चंद्रा द्वारा
मुझे दी गयी सूचना के अनुसार 52 पदों पर अनुसूचित जाति के, 15 पर
अनुसूचित जनजाति के , 73 पर अन्य पिछड़ा वर्ग के और 246 पर अनारक्षित
श्रेणी के अधिकारी कार्यरत हैं. कुल कार्यरत अधिकारियों में से 365
पदों पर हिंदू अधिकारी हैं और महज 10 पदों पर ही गैर मुस्लिम
अल्पसंख्यककार्यरत हैं और महज 11 पदों पर मुस्लिम अधिकारी कार्यरत हैं.

आरक्षित वर्ग के अधिकारियों का कम प्रतिनिधित्व बहुजन समाज पार्टी जैसी
पार्टियों की कथनी करनी के अंतर को सिद्ध कर रहा है और सूबे में
अल्पसंख्यक अधिकारियों की नगण्य संख्या में तैनाती एक बार फिर सिद्ध कर
रही है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का मुस्लिम प्रेम महज दिखावा
है क्योंकि मैने आज तक अखिलेश को इस संबंध में केंद्र से मुस्लिम
अधिकारियों की माँग करते नहीं देखा सुना है.

आरक्षित वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों का कम प्रतिनिधित्व समाज
के बंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाने को चलायी गयी योजनाओं और केंद्र
सरकार और उस की उन घोषणाओं की सफलता पर एक प्रश्नचिन्ह है क्यों कि
आज़ादी के इतने दिनों बाद भी आरक्षित वर्ग मुस्लिम समुदाय को मुख्य धारा
में लाने की इतनी योजनायें होने के बाब्जूद अपनी आवादी के अनुपात में इन
सेवाओं में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नगण्य है.

Urvashi Sharma
Mob. 8081898081

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