Sunday, April 3, 2016

आमंत्रण : यूपी की राजधानी लखनऊ में 11 अप्रैल को उद्घाटन के दिन ही आरटीआई भवन के मुख्य द्वार के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन l

प्रिय मित्रों,
हमारा उत्तर प्रदेश आवादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा सूबा है पर दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस सूबे में पारदर्शिता के सिपाहियों और सूचना आयुक्तों के बीच की जंग थमने का नाम लेती दिखाई नहीं दे रही है l जहाँ एक तरफ यूपी के सभी सूचना आयुक्त आने वाले 11 अप्रैल को गोमती नगर के विभूति खंड में 20 करोड़ रुपये की लागत से बने नए चार मंजिला आरटीआई भवन में कार्य करने को लेकर उत्साहित हैं और उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग को इन्दिरा भवन लखनऊ से गोमती नगर लखनऊ में निर्मित सूचना आयोग के नवीन भवन में स्थानान्तरित करने की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं मैंने हमारे सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना आयुक्तों पर आरटीआई आवेदकों का उत्पीडन करने और आरटीआई एक्ट के प्राविधानों से इतर
कार्य कर भ्रष्टाचार में लिप्त होकर व्यक्तिगत अभिलाभ अर्जित करने के
दुरुद्देश्य की पूर्ति करने के चलते ही आयोग की कार्यवाहियों की वीडियो
रिकॉर्डिंग न कराने के आरोपों का संज्ञान लेकर अपने नेतृत्व में 11 अप्रैल को गोमती नगर के विभूति खंड में बने आरटीआई भवन के उद्घाटन के दिन ही आरटीआई भवन के मुख्य द्वार के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर नवीन भवन में आयोग की सभी कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और इन रिकॉर्डिंग्स को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्ष द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने की माँग बुलंद करने के लिए कमर कस ली है । मैंने इस निमित्त निर्धारित प्रपत्र भरकर लखनऊ के जिलाधिकारी के कार्यालय में प्राप्त करा दिया है

मेरा आपसे कहना है कि यद्यपि आरटीआई एक्ट में सूचना आयुक्तों के लिए
पारदर्शिता के संरक्षक की भूमिका निर्धारित है पर यूपी के वर्तमान सूचना
आयुक्त इससे उलट नितांत अपारदर्शी और निरंकुश रीति से कार्य कर
पारदर्शिता के विनाशक बनते जा रहे हैं l मैंने बीते 19 मार्च को सूबे के राज्यपाल,मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और लखनऊ के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक ई-मेल के माध्यम से यूपी के सूचना आयुक्तों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होकर दोषी जन सूचना अधिकारियों को संरक्षण देकर भ्रष्टाचार को पोषित करने, आरटीआई आवेदकों द्वारा भ्रष्टाचार से सम्बंधित संवेदनशील प्रकरणों की सूचना मांगने पर पर उन पर झूंठे आरोप लगाकर उनको सुनवाइयों में आने से रोकने का षड्यंत्र करने के गंभीर आरोप लगाये हुए आशंका व्यक्त की है कि अपेक्षाकृत सुनसान गोमती नगर के विभूति खंड में बने नए आरटीआई भवन में वीडियो रिकॉर्डिंग के बिना सुनवाई होने पर आरटीआई आवेदक और अधिक असुरक्षित हो जायेंगे और साथ ही साथ सूचना आयुक्त और अधिक निरंकुश और भ्रष्ट हो जायेंगे l

मैं आपको बताना चाहती हूँ कि मैंने बीते 18 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्य
सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी को पत्र देकर इन मुद्दों पर वार्ता हेतु
आरटीआई कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को समय देने की माँग की थी किन्तु मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा इन संवेदनशील मामलों में असंवेदनशील रवैया रखने और आरटीआई हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों के मद्देनज़र ही मैंने सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं को एकजुट कर आने वाले 11 अप्रैल को उनके साथ गोमती नगर के विभूति खंड में बने आरटीआई भवन के उद्घाटन के दिन ही आरटीआई भवन के मुख्य द्वार के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर नवीन भवन में आयोग की सभी
कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और इन रिकॉर्डिंग्स
को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्ष द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने की माँग बुलंद करने का निश्चय किया है ।

साथियों ,यदि आवश्यकता हुई तो इस माँग के लिए मेरे नेतृत्व में सूचना आयोग में 'सविनय कार्य बहिष्कार' आन्दोलन और तत्पश्चात अहिंसक रूप से 'कार्य रोको' और 'जेल भरो आन्दोलन भी चलाया जायेगा ।


आप सभी के प्रतिभाग और सहयोग की अपेक्षा में :

भवदीया
उर्वशी शर्मा
मोबाइल 9369613513

यूपी में आरटीआई को कमजोर करने की साजिश में जुटे पत्रकार अमित मिश्र और आरटीआई एक्टिविस्ट मुन्नालाल शुक्ल l

पीत पत्रकारिता करने वाले पत्रकार हमेशा रहे हैं और रहेंगे भी l ऐसे ही एक पत्रकार हैं दैनिक जागरण लखनऊ के रिपोर्टर अमित मिश्र l इसी प्रकार आस्तीन के सांप आरटीआई एक्टिविस्ट भी हमेशा रहे हैं और रहेंगे भी l ऐसे ही एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं मुन्नालाल शुक्ल l

आज एक तरफ सूबे के आरटीआई आवेदक सूचनाएं न मिलने से बेहाल-परेशान हैं तो वहीं अपने निहितार्थ साधने के लिए मुन्नालाल शुक्ल सरीखे आरटीआइ कार्यकर्ता सूचना देने में उदासीन सरकारी विभागों को क्लीन चिट देने में लगे हुए हैं l

रिपोर्टर अमित मिश्र ने एक चौंकाने बाली रिसर्च की है कि आरटीआइ आवेदकों पर बढ़े हमलों का कारण मेरे जैसे आरटीआई एक्टिविस्ट हैं तो वहीं आरटीआइ कार्यकर्ता मुन्नालाल शुक्ल का कहना है कि आरटीआइ का इतना नुकसान तो उदासीन सरकारी विभागों ने भी नहीं किया है जितना आरटीआइ को दलाली का हथियार बनाने वाले तथाकथित एक्टिविस्टों ने कर दिया।

मैं इस पत्रकार अमित मिश्र और आरटीआइ कार्यकर्ता मुन्नालाल शुक्ल को खुला चैलेंज देती हूँ कि ये दोनों यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा ब्लैकमेलिंग, दलाली, उगाही और खुन्नस निकालने के मामलों की कुल संख्या इन सभी मामलों के प्रमाण सहित सार्वजनिक करें l

इन दोनों के इस प्रकार के आचरण का कारण शायद यह  कि ये दोनों, अर्थात अमित मिश्र और मुन्नालाल शुक्ल यूपी के भ्रष्ट सूचना आयुक्तों से पैसे पाकर आरटीआई को कमजोर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं जिसके लिए में इनकी सार्वजनिक भर्त्सना कर रही हूँ l आप भिज्ञ हैं कि  मेरे द्वारा आगामी 11 अप्रैल को नवीन आरटीआई भवन के उद्घाटन के समय ही नवीन आरटीआई भवन के गेट के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन करने के निर्णय से बौखलाए सूचना आयुक्तों ने अब अमित मिश्र जैसे बिकाऊ पत्रकार और मुन्नालाल शुक्ल जैसे बिकाऊ आरटीआइ कार्यकर्ता के मार्फत मुझ पर अपरोक्ष हमला बोला है जिसका स्वागत है l पर मैं हर लड़ाई प्रत्यक्ष और पारदर्शी रूप से लडती हूँ इसलिये इन दोनों का नाम लेकर इनकी सार्वजनिक भर्त्सना कर रही हूँ lपुतला दहन कार्यक्रम के मेरे प्लान और मांगों से संवंधित दिनांक 20 मार्च की खबर यहाँ पढ़ें http://gaongiraw.com/2016/03/20/153

विगत दिनों दैनिक जागरण के लखनऊ संस्करण के पेज 12 पर "आरटीआई को बना दिया वसूली का औजार" शीर्षक से एक खबर छपी  l इसमें केस संख्या 2 मुझसे सम्बंधित था  l इसमें रिपोर्टर अमित मिश्र ने लिखा  "समाज कल्याण विभाग में कार्यरत एक साहब किसी आरोप पर निलंबित कर दिए गए तो उनकी पत्नी ने आरटीआइ आवेदन कर कई सूचनाएं मांग लीं। विभाग जवाब देने में हिचकिचाया तो पत्नी ने शर्त रख दी कि मेरे पति को बहाल कर दो तो आरटीआइ आवेदन वापस ले लूंगी। विभाग ने बहाल कर दिया तो मैडम ने आवेदन वापस ले लिया, लेकिन उन्हें आरटीआइ का इस्तेमाल समझ आ गया। आनन-फानन में एनजीओ बनाया और बड़े पैमाने पर यही काम शुरू कर दिया।" संवंधित खबर यहाँ http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/30-mar-2016-edition-Lucknow-page_14-30105-3370-11.html

अमित मिश्र ने मेरे मामले का हवाला देते हुए लिखा है कि मेरे द्वारा आरटीआइ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो रहा है। अमित मिश्र का कहना है कि मुझे कोई संवैधानिक दर्जा या मानदेय नहीं मिलता, लेकिन फिर भी मैं फुलटाइम आरटीआइ एक्टिविस्ट बन गयी हूँ । अमित मिश्र के अनुसार मुन्नालाल शुक्ल सरीखे आरटीआइ एक्टिविस्ट तो वास्तव में जनोपयोगी सूचनाएं मांग रहे हैं पर मेरे जैसे आरटीआइ एक्टिविस्टो ने आरटीआइ को ब्लैकमेलिंग, दलाली, उगाही और खुन्नस निकालने का औजार बना लिया है और इससे ही आरटीआइ आवेदकों पर हमले बढ़े हैं।

अमित मिश्र ने अपने निहितार्थ साधने को मुझ पर आरटीआइ को ब्लैकमेलिंग, दलाली, उगाही और खुन्नस निकालने का औजार बनाने के झूंठे आरोप लगाए है जिसके लिए में पीत पत्रकारिता करने बाले इस पत्रकार की एक बार फिर सार्वजनिक भर्त्सना करते हुए अमित मिश्र को इस मामले पर मुझसे सप्रमाण इन-कैमरा बहस का खुला चैलेंज दे रही हूँ l आरटीआइ कार्यकर्ता मुन्नालाल शुक्ल को भी सप्रमाण इन-कैमरा बहस का खुला चैलेंज l

यदि ये दोनों मुझे या मेरे एनजीओ को गलत साबित कर दें तो मैं सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लूंगी अन्यथा अमित मिश्र पत्रकारिता छोड़ दें और मुन्ना लाल सार्वजनिक जीवन l

यदि इन दोनों ने एक माह में मेरा चैलेंज स्वीकार नहीं किया तो इन पर मानहानि का वाद दायर करूंगी l
 

Thursday, December 17, 2015

लखनऊ से उठी न्यायिक सुधार की मांग की चिंगारी को देश भर में फैलाकर ज्वाला बनायेंगे समाजसेवी

न्याय में देरी की बीमारी के इलाज के साथ साथ बीमारी न होने के भी उपाय
करे सरकार – उर्वशी शर्मा



लखनऊ/17 दिसम्बर 2015/ बीते 12 दिसम्बर को जहाँ एक तरफ पूरा देश लोक
अदालतों के माध्यम से मुकद्दमो के अम्बार को कम करके न्याय में देरी की
बीमारी के इलाज में व्यस्त था तो वहीं आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े
सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में सामाजिक संगठन
येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में देश भर से
आये समाजसेवी 12 फुट ऊंचे पोस्टर के साथ अदालतों की 'तारीख पे तारीख, दिए
जाने की कार्यप्रणाली के खिलाफ हुंकार भर मुकद्दमों का अम्बार इकठ्ठा
होने की बीमारी को होने से रोकने के लिए उपाय करने की मांग कर रहे थे.
समाजसेवियों ने न्यायिक सुधारों की मांग करते हुए जिलाधिकारी आवास से
जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क तक 'न्याय संघर्ष यात्रा 2015' के नाम
से पैदल शांति मार्च निकाला और महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे
मोमबत्ती जलाकर भारत की अदालतों में 'न्याय' की जगह 'तारीख पे तारीख' ही
मिलने की बात रखते हुए अदालती कार्यवाहियों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग
कराने, अदालतों में मामलों के निपटारे की अधिकतम समय सीमा निर्धारित करने
समेत अनेकों मांगों को बुलंद कर न्यायिक भ्रष्टाचार की भर्त्सना की और
अदालती कार्यवाहियों में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के लिए अपनी आवाज
बुलंद की.



कार्यक्रम की संयोजिका येश्वर्याज की सचिव और आरटीआई कार्यकर्त्ता उर्वशी
शर्मा ने एक बातचीत में बताया कि न्याय मिलने में देरी भी मानवाधिकारों
का उल्लंघन ही है और इसीलिये भारत की सभी अदालतों में सभी को एक
समान,सस्ता,सही और त्वरित न्याय दिलाने के लिए लखनऊ से शुरू की गए इस पहल
को अब एक देशव्यापी मुहिम का रूप दिया जाएगा. उर्वशी ने बताया कि लखनऊ से
उठी न्यायिक सुधार की इस चिंगारी को देश भर में फैलाकर ज्वाला बनाने की
इस मुहिम में येश्वर्याज के साथ साथ दिल्ली की सामाजिक संस्था फाइट 4
जुडिशिअल रिफॉर्म्स, गाजियावाद की राष्ट्रीय सूचना का अधिकार टास्क फोर्स
ट्रस्ट और लखनऊ की एस.आर.पी.डी.एम. समाज सेवा संस्थान ने यह निर्णय लिया
है कि शीघ्र ही देश के सभी राज्यों की राजधानियों में और उसके बाद देश भर
के सभी जिला मुख्यालयों में न्याय संघर्ष यात्राएं निकालकर न्यायिक
पारदर्शिता और जबाबदेही की मांग की जायेगी.




उर्वशी ने बताया कि न्यायिक भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए इस विरोध प्रदर्शन
के बाद येश्वर्याज ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के माध्यम से देश के
राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्य न्यायधीश और सभी प्रदेशों के
राज्यपालों,मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों को
समाजसेवियों द्वारा हस्ताक्षरित 5 सूत्रीय ज्ञापन भेजकर जजों के रिक्त
पदों को समयबद्ध रूप से भरने;जजों की नियुक्ति करने,जजों के कार्यों का
ऑडिट करने,भ्रष्टाचारी और अन्य मामलों के दोषी जजों की शिकायतों की जांच
के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्पेशल ज्युडिशिअल कमीशन जैसे स्वतंत्र आयोगों
की स्थापना करने; वर्तमान कानून में संशोधन करके अदालती कार्यवाहियों की
आडिओ-वीडिओ रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाने; सभी ट्रायल कोर्ट और अपीलीय
कोर्ट में मामलों के निस्तारण की अधिकतम समयसीमा का निर्धारण करने और
जजों के विरुद्ध शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की
मांग की है.



भारतीय संविधान की बात करते हुए उर्वशी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना
में स्वतंत्रता और समानता से पहले न्याय को जगह दिया जाना यह स्पष्ट करता
है कि संविधान निर्माताओं ने भारत के सभी नागरिकों को न्याय उपलब्ध कराने
को प्रमुखता दी थी किन्तु आजाद भारत की सरकारें इस संविधान के लागू होने
के 65 सालों के बाद भी न्यायिक प्रक्रियाओं में समानता स्थापित करने में
असफल ही रही हैं.उर्वशी ने कहा कि न्यायपालिका द्वारा स्वायत्तता के नाम
पर जवाबदेही से बचने के कारण ही न्याय व्यवस्था दूषित हो गयी है और न्याय
की एक पारदर्शी और जिम्मेदार प्रणाली विकसित किये बिना इस समस्या का
समाधान संभव ही नहीं है.

न्याय में देरी की बीमारी के इलाज के साथ साथ बीमारी न होने के भी उपाय करे सरकार – उर्वशी शर्मा

लखनऊ से उठी न्यायिक सुधार की मांग की चिंगारी को देश भर में फैलाकर
ज्वाला बनायेंगे समाजसेवी



लखनऊ/17 दिसम्बर 2015/ बीते 12 दिसम्बर को जहाँ एक तरफ पूरा देश लोक
अदालतों के माध्यम से मुकद्दमो के अम्बार को कम करके न्याय में देरी की
बीमारी के इलाज में व्यस्त था तो वहीं आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े
सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में सामाजिक संगठन
येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में देश भर से
आये समाजसेवी 12 फुट ऊंचे पोस्टर के साथ अदालतों की 'तारीख पे तारीख, दिए
जाने की कार्यप्रणाली के खिलाफ हुंकार भर मुकद्दमों का अम्बार इकठ्ठा
होने की बीमारी को होने से रोकने के लिए उपाय करने की मांग कर रहे थे.
समाजसेवियों ने न्यायिक सुधारों की मांग करते हुए जिलाधिकारी आवास से
जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क तक 'न्याय संघर्ष यात्रा 2015' के नाम
से पैदल शांति मार्च निकाला और महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे
मोमबत्ती जलाकर भारत की अदालतों में 'न्याय' की जगह 'तारीख पे तारीख' ही
मिलने की बात रखते हुए अदालती कार्यवाहियों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग
कराने, अदालतों में मामलों के निपटारे की अधिकतम समय सीमा निर्धारित करने
समेत अनेकों मांगों को बुलंद कर न्यायिक भ्रष्टाचार की भर्त्सना की और
अदालती कार्यवाहियों में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के लिए अपनी आवाज
बुलंद की.



कार्यक्रम की संयोजिका येश्वर्याज की सचिव और आरटीआई कार्यकर्त्ता उर्वशी
शर्मा ने एक बातचीत में बताया कि न्याय मिलने में देरी भी मानवाधिकारों
का उल्लंघन ही है और इसीलिये भारत की सभी अदालतों में सभी को एक
समान,सस्ता,सही और त्वरित न्याय दिलाने के लिए लखनऊ से शुरू की गए इस पहल
को अब एक देशव्यापी मुहिम का रूप दिया जाएगा. उर्वशी ने बताया कि लखनऊ से
उठी न्यायिक सुधार की इस चिंगारी को देश भर में फैलाकर ज्वाला बनाने की
इस मुहिम में येश्वर्याज के साथ साथ दिल्ली की सामाजिक संस्था फाइट 4
जुडिशिअल रिफॉर्म्स, गाजियावाद की राष्ट्रीय सूचना का अधिकार टास्क फोर्स
ट्रस्ट और लखनऊ की एस.आर.पी.डी.एम. समाज सेवा संस्थान ने यह निर्णय लिया
है कि शीघ्र ही देश के सभी राज्यों की राजधानियों में और उसके बाद देश भर
के सभी जिला मुख्यालयों में न्याय संघर्ष यात्राएं निकालकर न्यायिक
पारदर्शिता और जबाबदेही की मांग की जायेगी.




उर्वशी ने बताया कि न्यायिक भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए इस विरोध प्रदर्शन
के बाद येश्वर्याज ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के माध्यम से देश के
राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्य न्यायधीश और सभी प्रदेशों के
राज्यपालों,मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों को
समाजसेवियों द्वारा हस्ताक्षरित 5 सूत्रीय ज्ञापन भेजकर जजों के रिक्त
पदों को समयबद्ध रूप से भरने;जजों की नियुक्ति करने,जजों के कार्यों का
ऑडिट करने,भ्रष्टाचारी और अन्य मामलों के दोषी जजों की शिकायतों की जांच
के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्पेशल ज्युडिशिअल कमीशन जैसे स्वतंत्र आयोगों
की स्थापना करने; वर्तमान कानून में संशोधन करके अदालती कार्यवाहियों की
आडिओ-वीडिओ रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाने; सभी ट्रायल कोर्ट और अपीलीय
कोर्ट में मामलों के निस्तारण की अधिकतम समयसीमा का निर्धारण करने और
जजों के विरुद्ध शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की
मांग की है.



भारतीय संविधान की बात करते हुए उर्वशी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना
में स्वतंत्रता और समानता से पहले न्याय को जगह दिया जाना यह स्पष्ट करता
है कि संविधान निर्माताओं ने भारत के सभी नागरिकों को न्याय उपलब्ध कराने
को प्रमुखता दी थी किन्तु आजाद भारत की सरकारें इस संविधान के लागू होने
के 65 सालों के बाद भी न्यायिक प्रक्रियाओं में समानता स्थापित करने में
असफल ही रही हैं.उर्वशी ने कहा कि न्यायपालिका द्वारा स्वायत्तता के नाम
पर जवाबदेही से बचने के कारण ही न्याय व्यवस्था दूषित हो गयी है और न्याय
की एक पारदर्शी और जिम्मेदार प्रणाली विकसित किये बिना इस समस्या का
समाधान संभव ही नहीं है.

Friday, December 11, 2015

न्यायिक सुधारों की मांगों के लिए समाजसेवियों का जमावड़ा कल लखनऊ में l

न्यायिक सुधारों की मांगों के लिए समाजसेवियों का जमावड़ा कल लखनऊ में l


अदालती कार्यवाहियों में पारदर्शिता लाकर जजों की जबाबदेही निर्धारित
करके अदालतों की कार्यवाहियों से भ्रष्टाचार का खात्मा करने की आवाज
उठाने के लिए कल भारत के आबादी के हिसाब से सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश
की राजधानी लखनऊ में देश विदेश के समाजसेवी और देश के सामाजिक संगठन
न्याय यात्रा निकाल निकालेंगे और मोमबत्ती जलाकर शांति-प्रदर्शन करेंगे l
इस कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ के सामाजिक संगठन 'येश्वर्याज सेवा संस्थान'
की सचिव और समाजसेविका उर्वशी शर्मा के नेतृत्व किया जा रहा है l


कार्यक्रम के समन्वयक समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी
ने बताया कि न्याय यात्रा दोपहर बाद 3 बजे से 4 बजे के मध्य लखनऊ के
जिलाधिकारी आवास से आरम्भ होकर हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क
में संपन्न होगी और इसके बाद अपराह्न 04:30 बजे महात्मा गांधी की
प्रतिमा के नीचे मोमबत्ती जलाकर सबको समान और त्वरित न्याय दिलाने की
मांग के लिए प्रदर्शन किया जाएगा l


कार्यक्रम के सह-समन्वयन समाजसेवी राम स्वरुप यादव ने बताया कि इस
कार्यक्रम में येश्वर्याज के साथ-साथ दिल्ली की सामाजिक संस्था फाइट फॉर
जुडिशिअल रिफॉर्म्स, प्रेस भारती सिटीजन, गोरखपुर की परिवर्तन वेलफेयर
सोसाइटी, गाजियावाद की राष्ट्रीय सूचना का अधिकार टास्क फोर्स ट्रस्ट
,लखनऊ की एस.आर.पी.डी.एम.3एस.,जन जर्नलिस्ट एसोसिएशन और सोसाइटी फॉर
फ़ास्ट जस्टिस लखनऊ भी प्रतिभाग कर रही हैं l कार्यक्रम में भारत से बाहर
से सऊदी अरब से सुरजीत कुमार और यूपी के बाहर से आने बाले समाजसेवियों
में राजस्थान के हनुमानगढ़ से अनुज कुमार, राजस्थान के पाली से प्रबीन
कुमार, राजस्थान के जोधपुर से जगदीश कुमार श्रीमाली, गुजरात के सूरत से
हर्ष छाबड़ा और हर्ष मोरदिया, असम के गौहाटी से विश्वजीत कलिता,पंजाब के
अमृतसर से प्रबोध चन्द्र बाली, मध्य प्रदेश के ग्वालियर से अमित मिश्र और
दिल्ली से सुदेश सोनकर,कुमार सत्यम,आर.के.त्यागी,ज्योति पाठक,प्रियंवदा
शुक्ल,अभिषेक शर्मा और गुलशन पाहुजा,मुंगेर से मंटू शर्मा,मुंबई से विजय
जेस्सानी,सलमान अंसारी कार्यक्रम में शिरकत करेंगें l इनके अतिरिक्त यूपी
के मोदीनगर (गाजियावाद) से सुरेश शर्मा, हापुड़ से महावीर वर्मा,बस्ती से
हरीराम शर्मा,झांसी से कपिल तिवारी,बदायूँ से राहुल गुप्ता,सुल्तानपुर से
नीरज तिवारी,वाराणसी से रवि बसाक,हरिद्वार से मनोज कुमार,बरेली के कवि
प्रदीप वैरागी,मुरादाबाद से अवि सिंह. गोरखपुर से डा० मनीष चौबे,शिवपुरी
से अभय नाथ बाजपेई, कानपुर से विवेक गुप्ता और नॉएडा से अमित मिश्र लखनऊ
आकर इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे l इसके अतिरिक्त लखनऊ से राशिद अली
आजाद, रुवैद किदवई, शीबू निगम,अशफाक खान,आलोक कुमार सिंह,अनवर आलम,सुभाष
चन्द्र विश्वकर्मा,संजय आजाद,अब्दुल्ला सिद्दीकी,अरुण कुमार
पाण्डेय,अश्विनी जायसवाल,हरपाल सिंह,हयात कादरी,अभिषेक पाण्डेय रूपक,शमीम
अहमद,मनीष त्रिपाठी,होमेंद्र पाण्डेय समेत बड़ी संख्या में समाजसेवी
प्रतिभाग करेंगे l यादव ने बताया कि कार्यक्रम की अद्यतन जानकारी इवेंट
के पेज https://www.facebook.com/events/967905499949064/ पर उपलब्ध है
l


इतने बड़े स्तर पर किये जा रहे कार्यक्रम की पूर्व अनुमति के बाबत पूछने
पर उर्वशी ने बताया कि उन्होंने इस कार्यक्रम की सूचना हेतु निर्धारित
प्रपत्र भरकर दिनांक 20-11-15 को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त करा
दिया था और इस सम्बन्ध में सूबे के राज्यपाल, सी.एम., मुख्य
सचिव,डी.जी.पी.,लखनऊ के जिलाधिकारी और एस.एस.पी. को भी इस कार्यक्रम की
सूचना ई-मेल के माध्यम से दी जा चुकी है l


कार्यक्रम के लिए भेजा गया ई-मेल और कार्यक्रम में प्रयुक्त होने बाले
बैनर,पोस्टर्स की 6 जे.पी.जी. फाइल्स वेबलिंक
http://upcpri.blogspot.in/2015/12/12-2015-l_10.html पर उपलब्ध हैं l

Wednesday, December 9, 2015

Invite : Peace March & Candle-lite demonstration on Saturday, 12th December 2015 in Lucknow, Uttar Pradesh, India against judicial corruption in Indian courts and for demand of judicial transparency & accountability in Indian courts.

आमंत्रण : भारत की अदालतों में व्याप्त न्यायिक भ्रष्टाचार के खिलाफ और इन अदालतों में न्यायिक पारदर्शिता और जबाबदेही स्थापित करने की मांग बुलंद करने के लिए पैदल मार्च और मोमबत्ती जलाकर शांति प्रदर्शन लखनऊ ( उत्तर प्रदेश,भारत ) में शनिवार,12 दिसम्बर 2015 को l