सपा प्रमुख मुलायम सिंह स्वयं को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी दिखाने - बताने में कभी भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते है.यही हाल यूपी की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में मुस्लिम चेहरा माने जाने बाले आज़म ख़ान का भी है. रामपुर बाले वही आज़म ख़ान जो सपा प्रमुख मुलायम सिंह का शाही जश्न आयोजित कर अपने ट्रस्ट के लिए महज 9900/- में सरकार से अरवो-खर्वो की कीमत की परिसंपत्तियाँ 99 साल के लिए
रिटर्न गिफ्ट के रूप में पा लेते हैं और फिर से कोई और मँहगा रिटर्न गिफ्ट लेने के लिए अब मुलायम सिंह का मंदिर बनबाने की बात हवा में फैला देते है. बड़ा सबाल यह है सपा सरकार द्वारा एकमात्र आज़म ख़ान को तुष्ट करदेने मात्र से ही अखिलेश आख़िर किस आधार पर यह मान रहे हैं कि उनकी सरकार ने पूरी यूपी के अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए बहुत कुछ कर दिया है जबकि उनकी
सरकार सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अभी तक सोयी पड़ी है.
मैं तो आश्चर्यचकित हूँ कि उच्च पदों पर आसीन ये नेता सार्वजनिक जीवन में कितना सफेद झूंठ बोलते है और जाने कैसे इतना सफेद झूंठ बोल लेते हैं. जाने कैसे ये लोग हर जगह जन सरोकार के मुद्दे नहीं बल्कि अपना व्यक्तिगत लाभ और अपने वोट ही तलाशते रहते है . जब मुसलमानों के बारे में सोचती हूँ और देखती हूँ तो पाती हूँ कि वैसे तो मुलायम सिंह अपने आप को मुसलमानों का मसीहा कहते है और
गाहे-बगाहे अयोध्या-बाबरी मस्जिद प्रकरण पर भोले भाले मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर उनको अपने पाले में करने का प्रयास करते हैं तो वही मायावती हैं जो जब तब मुस्लिम हितों को सर्वोपरि बताते हुए विशाल रैलियां करते हुए मुसलमानों को लुभाने का प्रयास करती हैं. लगभग 3 साल के अपने कार्यकाल में अखिलेश ने तो अपने आपको वहाँ खड़ा कर दिया है जहाँ जनता ने उनसे कोई भी उम्मीद
करना ही छोड़ दिया है. मेरा मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अखिलेश से अधिक स्वतंत्र निर्णय ले लेते थे. पर इन सबमें मुसलमानों के जमीनी विकास के मुद्दे कही पीछे छूटते जा रहे हैं और सरकारें और विपक्ष अपने फायदे के लिए बेबजह की बयानबाजी से आगे नहीं आ पाया है |
गौरतलब है कि 9 मार्च 2005 को भारत के प्रधानमंत्री ने भारत में मुसलमानों के सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति के आंकलन के लिए सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का कथन किया था| जस्टिस सच्चर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने 17 नवम्बर 2006 को अपनी शिफारिशें प्रधान मंत्री को सौंप दीं जो 30 नवम्बर 2006 को लोक सभा के पटल पर रखीं गयीं | 403 पेज की इस रिपोर्ट में मुसलामानों की सामाजिक,आर्थिक और
शैक्षिक स्थिति में सुधार की बुनियादी शिफारिशें की थीं|
मैंने उत्तर प्रदेश सरकार से आरटीआई के तहत यह जानना चाहा था कि आखिर मुसलमानों के हितों का ढोल पीटने बाली सरकारों ने इस अहम् रिपोर्ट पर अमल कर मुसलमानों का बुनियादी विकास कर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए क्या किया है. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि एक माह में सूचना देने की अनिवार्यता होने पर भी इस अहम् मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने मुझे सूचना देने में 2 साल से
भी अधिक लगा दिए और अब सूचना आयोग के दखल के बाद उत्तर प्रदेश शासन के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-4 के उप सचिव और जन सूचना अधिकारी आर. एन. द्विवेदी ने बीते 11 फ़रवरी के पत्र के माध्यम से जो सूचना दी हैं वह बेहद चौंकाने वाली होने के साथ साथ उत्तर प्रदेश की सरकारों के कथित मुसलमान-प्रेम की ढोल की पोल भी उजागर करती है.
आर. एन. द्विवेदी के इस पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु अभी तक कोई नियम /विनियम/शासनादेश आदि निर्गत नहीं किया गया है|आर. एन. द्विवेदी ने इस सम्बन्ध में शून्य सूचना का होना भी लिखा है.
यह हाल उस सरकार का है जिसके सिपहसालार आज़म ख़ान अपने आपको मुसलमानों का झंडाबर्दार सिद्ध करने के लिए संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल तक को भी गाहे-बजाहे ताल ठोंककर ललकारते रहते हैं पर उत्तर प्रदेश के मुसलमानों की सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में योजनाबद्ध सुधार लाने के लिए सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अपने महकमे से भी कोई भी कार्यवाही नही करा पाते हैं. अब आज़म ख़ान
को मुसलमानों के विकास से तो कोई सरोकार है नहीं. उनको तो मतलब है बस अपने आप से और इन तीन सालों में उन्होने अपने हित तो खूब साधे हैं. जी हाँ, मेरा मतलब है अपनी पत्नी को लोकसभा में भेजना,रामपुर में अपने ट्रस्ट की माली हालत को ठीक करना, रामपुर में अपनी राजनैतिक ज़मीन को मजबूती देने को कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना आदि आदि. और फिर उनको फ़ुर्सत ही कहाँ है सस्ती लोकप्रियता पाने और खबरों
में बने रहने के लिए बेबजह की बयानबाज़ी करने से जो वह मुसलमानों के विकास के बारे में सोचें.
बड़ा सवाल यह भी है कि 30 नवम्बर 2006 से अब तक की आठ साल से ज्यादा की अवधि में मुलायम सिंह,मायावती और अखिलेश जैसे अपने आप को मुसलमानों का झंडाबरदार कहने वाले नेता सूबे के मुखिया रहे हैं जो जब-तब मुसलमानों के लिए लोक लुभावन घोषणाएं तो प्रायः ही करते रहे है पर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुसलमानों के बुनियादी मुद्दों को सम्बोधित करने बाली इस रिपोर्ट पर सिलसिलेवार अमल कर
मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने का कोई भी प्रयास किया ही नहीं गया है.
मैं इस सम्बन्ध में अखिलेश से अपील करती हूँ कि वे दिखावटी वादों से हटकर बुनियादी विकास के मुद्दों पर काम करें क्योंकि कमजोर बुनियादों पर बनी आलीशान इमारतें भी अधिक समय तक खड़ी नहीं रह पाती हैं. मैं अखिलेश को सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सिलसिलेवार लागू करने के लिए ज्ञापन भी दे रही हूँ और जल्द ही इस सम्बन्ध में जन-आंदोलन भी चलाया जायेगा|
Pls. Download RTI reply from undergiven weblink :
http://upcpri.blogspot.in/2015/02/blog-post_23.html
Urvashi Sharma
Mobile-9369613513
RTI ACT 2005 related posts on blog National RTI Forum for Research and Analysis
Monday, February 23, 2015
सपा कार्यकाल में भी नहीं हुआ मुसलमानों के जमीनी विकास के मुद्दों पर कोई काम : साधक-सिद्धक बन अपने-अपने निजी हित साध रहे मुलायम-आज़म : अखिलेश सरकार का अल्पसंख्यक प्रेम महज ढोंग : सपा ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर तीन साल में नहीं की है कोई भी कार्यवाही : आरटीआई से खुलासा
सपा प्रमुख मुलायम सिंह स्वयं को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी दिखाने -
बताने में कभी भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते है.यही हाल यूपी की सत्तारूढ़
समाजवादी पार्टी में मुस्लिम चेहरा माने जाने बाले आज़म ख़ान का भी है.
रामपुर बाले वही आज़म ख़ान जो सपा प्रमुख मुलायम सिंह का शाही जश्न
आयोजित कर अपने ट्रस्ट के लिए महज 9900/- में सरकार से अरवो-खर्वो की
कीमत की परिसंपत्तियाँ 99 साल के लिए रिटर्न गिफ्ट के रूप में पा लेते
हैं और फिर से कोई और मँहगा रिटर्न गिफ्ट लेने के लिए अब मुलायम सिंह का
मंदिर बनबाने की बात हवा में फैला देते है. बड़ा सबाल यह है सपा सरकार
द्वारा एकमात्र आज़म ख़ान को तुष्ट करदेने मात्र से ही अखिलेश आख़िर
किस आधार पर यह मान रहे हैं कि उनकी सरकार ने पूरी यूपी के अल्पसंख्यकों
को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए बहुत कुछ कर दिया है जबकि उनकी
सरकार सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अभी तक सोयी पड़ी है.
मैं तो आश्चर्यचकित हूँ कि उच्च पदों पर आसीन ये नेता सार्वजनिक जीवन में
कितना सफेद झूंठ बोलते है और जाने कैसे इतना सफेद झूंठ बोल लेते हैं.
जाने कैसे ये लोग हर जगह जन सरोकार के मुद्दे नहीं बल्कि अपना व्यक्तिगत
लाभ और अपने वोट ही तलाशते रहते है . जब मुसलमानों के बारे में सोचती
हूँ और देखती हूँ तो पाती हूँ कि वैसे तो मुलायम सिंह अपने आप को
मुसलमानों का मसीहा कहते है और गाहे-बगाहे अयोध्या-बाबरी मस्जिद प्रकरण
पर भोले भाले मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर उनको अपने पाले में
करने का प्रयास करते हैं तो वही मायावती हैं जो जब तब मुस्लिम हितों को
सर्वोपरि बताते हुए विशाल रैलियां करते हुए मुसलमानों को लुभाने का
प्रयास करती हैं. लगभग 3 साल के अपने कार्यकाल में अखिलेश ने तो अपने
आपको वहाँ खड़ा कर दिया है जहाँ जनता ने उनसे कोई भी उम्मीद करना ही छोड़
दिया है. मेरा मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अखिलेश
से अधिक स्वतंत्र निर्णय ले लेते थे. पर इन सबमें मुसलमानों के जमीनी
विकास के मुद्दे कही पीछे छूटते जा रहे हैं और सरकारें और विपक्ष अपने
फायदे के लिए बेबजह की बयानबाजी से आगे नहीं आ पाया है |
गौरतलब है कि 9 मार्च 2005 को भारत के प्रधानमंत्री ने भारत में
मुसलमानों के सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति के आंकलन के लिए सात
सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का कथन किया था| जस्टिस सच्चर की अध्यक्षता
वाली इस समिति ने 17 नवम्बर 2006 को अपनी शिफारिशें प्रधान मंत्री को
सौंप दीं जो 30 नवम्बर 2006 को लोक सभा के पटल पर रखीं गयीं | 403 पेज
की इस रिपोर्ट में मुसलामानों की सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में
सुधार की बुनियादी शिफारिशें की थीं|
मैंने उत्तर प्रदेश सरकार से आरटीआई के तहत यह जानना चाहा था कि आखिर
मुसलमानों के हितों का ढोल पीटने बाली सरकारों ने इस अहम् रिपोर्ट पर अमल
कर मुसलमानों का बुनियादी विकास कर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने के
लिए क्या किया है. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि एक माह में सूचना
देने की अनिवार्यता होने पर भी इस अहम् मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने
मुझे सूचना देने में 2 साल से भी अधिक लगा दिए और अब सूचना आयोग के दखल
के बाद उत्तर प्रदेश शासन के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-4 के उप
सचिव और जन सूचना अधिकारी आर. एन. द्विवेदी ने बीते 11 फ़रवरी के पत्र
के माध्यम से जो सूचना दी हैं वह बेहद चौंकाने वाली होने के साथ साथ
उत्तर प्रदेश की सरकारों के कथित मुसलमान-प्रेम की ढोल की पोल भी उजागर
करती है.
आर. एन. द्विवेदी के इस पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु अभी तक कोई
नियम /विनियम/शासनादेश आदि निर्गत नहीं किया गया है|आर. एन. द्विवेदी ने
इस सम्बन्ध में शून्य सूचना का होना भी लिखा है.
यह हाल उस सरकार का है जिसके सिपहसालार आज़म ख़ान अपने आपको मुसलमानों का
झंडाबर्दार सिद्ध करने के लिए संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल तक को भी
गाहे-बजाहे ताल ठोंककर ललकारते रहते हैं पर उत्तर प्रदेश के मुसलमानों
की सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में योजनाबद्ध सुधार लाने के लिए
सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अपने महकमे से भी कोई भी कार्यवाही नही करा
पाते हैं. अब आज़म ख़ान को मुसलमानों के विकास से तो कोई सरोकार है नहीं.
उनको तो मतलब है बस अपने आप से और इन तीन सालों में उन्होने अपने हित तो
खूब साधे हैं. जी हाँ, मेरा मतलब है अपनी पत्नी को लोकसभा में
भेजना,रामपुर में अपने ट्रस्ट की माली हालत को ठीक करना, रामपुर में अपनी
राजनैतिक ज़मीन को मजबूती देने को कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना आदि आदि. और
फिर उनको फ़ुर्सत ही कहाँ है सस्ती लोकप्रियता पाने और खबरों में बने
रहने के लिए बेबजह की बयानबाज़ी करने से जो वह मुसलमानों के विकास के
बारे में सोचें.
बड़ा सवाल यह भी है कि 30 नवम्बर 2006 से अब तक की आठ साल से ज्यादा की
अवधि में मुलायम सिंह,मायावती और अखिलेश जैसे अपने आप को मुसलमानों का
झंडाबरदार कहने वाले नेता सूबे के मुखिया रहे हैं जो जब-तब मुसलमानों के
लिए लोक लुभावन घोषणाएं तो प्रायः ही करते रहे है पर यह दुर्भाग्यपूर्ण
है कि प्रदेश के मुसलमानों के बुनियादी मुद्दों को सम्बोधित करने बाली
इस रिपोर्ट पर सिलसिलेवार अमल कर मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और
शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने का कोई
भी प्रयास किया ही नहीं गया है.
मैं इस सम्बन्ध में अखिलेश से अपील करती हूँ कि वे दिखावटी वादों से हटकर
बुनियादी विकास के मुद्दों पर काम करें क्योंकि कमजोर बुनियादों पर बनी
आलीशान इमारतें भी अधिक समय तक खड़ी नहीं रह पाती हैं. मैं अखिलेश को
सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सिलसिलेवार लागू करने के लिए ज्ञापन भी दे रही
हूँ और जल्द ही इस सम्बन्ध में जन-आंदोलन भी चलाया जायेगा|
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
बताने में कभी भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते है.यही हाल यूपी की सत्तारूढ़
समाजवादी पार्टी में मुस्लिम चेहरा माने जाने बाले आज़म ख़ान का भी है.
रामपुर बाले वही आज़म ख़ान जो सपा प्रमुख मुलायम सिंह का शाही जश्न
आयोजित कर अपने ट्रस्ट के लिए महज 9900/- में सरकार से अरवो-खर्वो की
कीमत की परिसंपत्तियाँ 99 साल के लिए रिटर्न गिफ्ट के रूप में पा लेते
हैं और फिर से कोई और मँहगा रिटर्न गिफ्ट लेने के लिए अब मुलायम सिंह का
मंदिर बनबाने की बात हवा में फैला देते है. बड़ा सबाल यह है सपा सरकार
द्वारा एकमात्र आज़म ख़ान को तुष्ट करदेने मात्र से ही अखिलेश आख़िर
किस आधार पर यह मान रहे हैं कि उनकी सरकार ने पूरी यूपी के अल्पसंख्यकों
को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए बहुत कुछ कर दिया है जबकि उनकी
सरकार सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अभी तक सोयी पड़ी है.
मैं तो आश्चर्यचकित हूँ कि उच्च पदों पर आसीन ये नेता सार्वजनिक जीवन में
कितना सफेद झूंठ बोलते है और जाने कैसे इतना सफेद झूंठ बोल लेते हैं.
जाने कैसे ये लोग हर जगह जन सरोकार के मुद्दे नहीं बल्कि अपना व्यक्तिगत
लाभ और अपने वोट ही तलाशते रहते है . जब मुसलमानों के बारे में सोचती
हूँ और देखती हूँ तो पाती हूँ कि वैसे तो मुलायम सिंह अपने आप को
मुसलमानों का मसीहा कहते है और गाहे-बगाहे अयोध्या-बाबरी मस्जिद प्रकरण
पर भोले भाले मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर उनको अपने पाले में
करने का प्रयास करते हैं तो वही मायावती हैं जो जब तब मुस्लिम हितों को
सर्वोपरि बताते हुए विशाल रैलियां करते हुए मुसलमानों को लुभाने का
प्रयास करती हैं. लगभग 3 साल के अपने कार्यकाल में अखिलेश ने तो अपने
आपको वहाँ खड़ा कर दिया है जहाँ जनता ने उनसे कोई भी उम्मीद करना ही छोड़
दिया है. मेरा मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अखिलेश
से अधिक स्वतंत्र निर्णय ले लेते थे. पर इन सबमें मुसलमानों के जमीनी
विकास के मुद्दे कही पीछे छूटते जा रहे हैं और सरकारें और विपक्ष अपने
फायदे के लिए बेबजह की बयानबाजी से आगे नहीं आ पाया है |
गौरतलब है कि 9 मार्च 2005 को भारत के प्रधानमंत्री ने भारत में
मुसलमानों के सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति के आंकलन के लिए सात
सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का कथन किया था| जस्टिस सच्चर की अध्यक्षता
वाली इस समिति ने 17 नवम्बर 2006 को अपनी शिफारिशें प्रधान मंत्री को
सौंप दीं जो 30 नवम्बर 2006 को लोक सभा के पटल पर रखीं गयीं | 403 पेज
की इस रिपोर्ट में मुसलामानों की सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में
सुधार की बुनियादी शिफारिशें की थीं|
मैंने उत्तर प्रदेश सरकार से आरटीआई के तहत यह जानना चाहा था कि आखिर
मुसलमानों के हितों का ढोल पीटने बाली सरकारों ने इस अहम् रिपोर्ट पर अमल
कर मुसलमानों का बुनियादी विकास कर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने के
लिए क्या किया है. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि एक माह में सूचना
देने की अनिवार्यता होने पर भी इस अहम् मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने
मुझे सूचना देने में 2 साल से भी अधिक लगा दिए और अब सूचना आयोग के दखल
के बाद उत्तर प्रदेश शासन के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-4 के उप
सचिव और जन सूचना अधिकारी आर. एन. द्विवेदी ने बीते 11 फ़रवरी के पत्र
के माध्यम से जो सूचना दी हैं वह बेहद चौंकाने वाली होने के साथ साथ
उत्तर प्रदेश की सरकारों के कथित मुसलमान-प्रेम की ढोल की पोल भी उजागर
करती है.
आर. एन. द्विवेदी के इस पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु अभी तक कोई
नियम /विनियम/शासनादेश आदि निर्गत नहीं किया गया है|आर. एन. द्विवेदी ने
इस सम्बन्ध में शून्य सूचना का होना भी लिखा है.
यह हाल उस सरकार का है जिसके सिपहसालार आज़म ख़ान अपने आपको मुसलमानों का
झंडाबर्दार सिद्ध करने के लिए संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल तक को भी
गाहे-बजाहे ताल ठोंककर ललकारते रहते हैं पर उत्तर प्रदेश के मुसलमानों
की सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में योजनाबद्ध सुधार लाने के लिए
सच्चर कमेटी की शिफारिशों पर अपने महकमे से भी कोई भी कार्यवाही नही करा
पाते हैं. अब आज़म ख़ान को मुसलमानों के विकास से तो कोई सरोकार है नहीं.
उनको तो मतलब है बस अपने आप से और इन तीन सालों में उन्होने अपने हित तो
खूब साधे हैं. जी हाँ, मेरा मतलब है अपनी पत्नी को लोकसभा में
भेजना,रामपुर में अपने ट्रस्ट की माली हालत को ठीक करना, रामपुर में अपनी
राजनैतिक ज़मीन को मजबूती देने को कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना आदि आदि. और
फिर उनको फ़ुर्सत ही कहाँ है सस्ती लोकप्रियता पाने और खबरों में बने
रहने के लिए बेबजह की बयानबाज़ी करने से जो वह मुसलमानों के विकास के
बारे में सोचें.
बड़ा सवाल यह भी है कि 30 नवम्बर 2006 से अब तक की आठ साल से ज्यादा की
अवधि में मुलायम सिंह,मायावती और अखिलेश जैसे अपने आप को मुसलमानों का
झंडाबरदार कहने वाले नेता सूबे के मुखिया रहे हैं जो जब-तब मुसलमानों के
लिए लोक लुभावन घोषणाएं तो प्रायः ही करते रहे है पर यह दुर्भाग्यपूर्ण
है कि प्रदेश के मुसलमानों के बुनियादी मुद्दों को सम्बोधित करने बाली
इस रिपोर्ट पर सिलसिलेवार अमल कर मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और
शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उनको समाज की मुख्यधारा में लाने का कोई
भी प्रयास किया ही नहीं गया है.
मैं इस सम्बन्ध में अखिलेश से अपील करती हूँ कि वे दिखावटी वादों से हटकर
बुनियादी विकास के मुद्दों पर काम करें क्योंकि कमजोर बुनियादों पर बनी
आलीशान इमारतें भी अधिक समय तक खड़ी नहीं रह पाती हैं. मैं अखिलेश को
सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सिलसिलेवार लागू करने के लिए ज्ञापन भी दे रही
हूँ और जल्द ही इस सम्बन्ध में जन-आंदोलन भी चलाया जायेगा|
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
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101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
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Sunday, February 15, 2015
Help 'RTI Girl' Aishwarya Parashar in achieving 1 Lakh Signature target for the cause of 'Total Gomti Cleaning'
Help 'RTI Girl' Aishwarya Parashar in achieving 1 Lakh Signature target for the cause of 'Total Gomti Cleaning'
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Thanks a lot to all of you who supported Aishwarya's social endeavor. Aishwarya has sent today's memorandum and has decided to take 1 lakh signatures and then meet the authorities concerned personally to press her demand.
We presume that Aishwarya's demands are your demands as well so help her to reach her target of 1 lakh signatures as soon as possible.
Please take a print of the demand letter, add your demands ( if you wish ) take signatures and send these to 101, Narayan Tower, F Block, Rajajipuram, Lucknow-226017, Uttar Pradesh.
http://upcpri.blogspot.in/2015/02/help-rti-girl-aishwarya-parashar-in.html
Copy of Memo :
सेवा में,
1-श्री राम नाइक
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
2- श्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
3- श्री अलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
विषय : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग.
महोदय,
मेरा नाम ऐश्वर्या पाराशर है और मैं कक्षा 8 की छात्रा हूँ. मेरे द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह
भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए मुझे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है.
हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में स्थित 15 शहर में से सबसे
प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर मैने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी
की सफाई होगी कैसे ? मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक कि गोमती
की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी
सफाई का असर दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी.
मेरे साथ साथ भारत के सजग नागरिक आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में चलने बाले इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर
नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की माँग कर रहे हैं.
आशा है कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए आप हमारी माँगों को अवश्य पूरा कर प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का यह अधिकार अवश्य देंगे .
प्रतिलिपि : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित को प्रेषित:
1- श्री प्रणब मुखर्जी
राष्ट्रपति - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत - 110001
2- श्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री-भारत सरकार
नई दिल्ली – 110001
3- सुश्री उमा भारती
मंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
भारत सरकार, नई दिल्ली - 110001
4- श्री राजनाथ सिंह
सांसद - लखनऊ एवं
गृहमंत्री - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत
अत्यधिक अपेक्षाओं सहित सादर प्रेषित -
1- ऐश्वर्या पाराशर,101 नारायण टॉवर,F ब्लॉक ,राजाजीपुरम,लखनऊ.
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Thanks a lot to all of you who supported Aishwarya's social endeavor. Aishwarya has sent today's memorandum and has decided to take 1 lakh signatures and then meet the authorities concerned personally to press her demand.
We presume that Aishwarya's demands are your demands as well so help her to reach her target of 1 lakh signatures as soon as possible.
Please take a print of the demand letter, add your demands ( if you wish ) take signatures and send these to 101, Narayan Tower, F Block, Rajajipuram, Lucknow-226017, Uttar Pradesh.
http://upcpri.blogspot.in/2015/02/help-rti-girl-aishwarya-parashar-in.html
Copy of Memo :
सेवा में,
1-श्री राम नाइक
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
2- श्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
3- श्री अलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
विषय : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग.
महोदय,
मेरा नाम ऐश्वर्या पाराशर है और मैं कक्षा 8 की छात्रा हूँ. मेरे द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह
भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए मुझे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है.
हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में स्थित 15 शहर में से सबसे
प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर मैने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी
की सफाई होगी कैसे ? मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक कि गोमती
की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी
सफाई का असर दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी.
मेरे साथ साथ भारत के सजग नागरिक आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में चलने बाले इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर
नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की माँग कर रहे हैं.
आशा है कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए आप हमारी माँगों को अवश्य पूरा कर प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का यह अधिकार अवश्य देंगे .
प्रतिलिपि : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित को प्रेषित:
1- श्री प्रणब मुखर्जी
राष्ट्रपति - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत - 110001
2- श्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री-भारत सरकार
नई दिल्ली – 110001
3- सुश्री उमा भारती
मंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
भारत सरकार, नई दिल्ली - 110001
4- श्री राजनाथ सिंह
सांसद - लखनऊ एवं
गृहमंत्री - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत
अत्यधिक अपेक्षाओं सहित सादर प्रेषित -
1- ऐश्वर्या पाराशर,101 नारायण टॉवर,F ब्लॉक ,राजाजीपुरम,लखनऊ.
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'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' आरंभ करने की मांग के कक्षा 8 की छात्रा के अभियान की शुरुआत : 1 लाख हस्ताक्षर कर समर्थन जुटाएगी 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर।
Find pictures of signature campaign at
http://aishwarya-parashar.blogspot.in/2015/02/rti-girl-kickstarts-signature-campaign.html
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना
हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक
15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के
पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के
नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या
में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के
बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की
सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण
स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती
नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से
लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल
क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक
संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग
की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की
छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ
हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी
गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च
नहीं किया है . उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा
है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश
सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के
लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक
नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है .
माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य
से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल
या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी
मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र
के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां
इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके
बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर
और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा
में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के
प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से
प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं.
सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती
में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी
सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की
सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक
रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा
किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी
कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की
खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों
के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को
अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में
आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब
तक कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से
शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर
क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी
समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के
अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के
अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ
इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के
संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी
की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य
ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार
अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की
उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने
से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं
'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15
अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय
अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से देश के सामने उजागर करने
बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद
हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि
गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन
जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से
मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
'RTI Girl' kickstarts signature campaign for a 'Total Gomti Cleaning
Plan' : Targets 1 lakh signatures
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
http://aishwarya-parashar.blogspot.in/2015/02/rti-girl-kickstarts-signature-campaign.html
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना
हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक
15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के
पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के
नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या
में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के
बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की
सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण
स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती
नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से
लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल
क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक
संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग
की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की
छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ
हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी
गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च
नहीं किया है . उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा
है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश
सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के
लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक
नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है .
माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य
से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल
या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी
मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र
के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां
इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके
बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर
और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा
में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के
प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से
प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं.
सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती
में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी
सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की
सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक
रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा
किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी
कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की
खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों
के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को
अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में
आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब
तक कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से
शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर
क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी
समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के
अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के
अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ
इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के
संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी
की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य
ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार
अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की
उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने
से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं
'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15
अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय
अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से देश के सामने उजागर करने
बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद
हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि
गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन
जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से
मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
'RTI Girl' kickstarts signature campaign for a 'Total Gomti Cleaning
Plan' : Targets 1 lakh signatures
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
'RTI Girl' kickstarts signature campaign for a 'Total Gomti Cleaning Plan' : Targets 1 lakh signatures
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' आरंभ करने की मांग के कक्षा 8 की छात्रा
के अभियान की शुरुआत : 1 लाख हस्ताक्षर कर समर्थन जुटाएगी 'आरटीआई गर्ल'
ऐश्वर्या पाराशर।
Find pictures of signature campaign at
http://aishwarya-parashar.blogspot.in/2015/02/rti-girl-kickstarts-signature-campaign.html
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना
हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक
15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के
पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के
नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या
में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के
बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की
सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण
स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती
नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से
लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल
क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक
संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग
की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की
छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ
हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी
गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च
नहीं किया है . उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा
है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश
सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के
लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक
नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है .
माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य
से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल
या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी
मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र
के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां
इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके
बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर
और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा
में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के
प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से
प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं.
सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती
में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी
सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की
सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक
रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा
किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी
कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की
खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों
के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को
अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में
आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब
तक कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से
शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर
क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी
समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के
अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के
अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ
इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के
संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी
की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य
ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार
अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की
उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने
से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं
'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15
अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय
अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से देश के सामने उजागर करने
बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद
हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि
गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन
जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से
मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
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that i should delete your name from my mailing list.
के अभियान की शुरुआत : 1 लाख हस्ताक्षर कर समर्थन जुटाएगी 'आरटीआई गर्ल'
ऐश्वर्या पाराशर।
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http://aishwarya-parashar.blogspot.in/2015/02/rti-girl-kickstarts-signature-campaign.html
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना
हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक
15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के
पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के
नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या
में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के
बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की
सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण
स्तर की जाँचें कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती
नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से
लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल
क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक
संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग
की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की
छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ
हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी
गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च
नहीं किया है . उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा
है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश
सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के
लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक
नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है .
माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य
से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल
या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी
मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के
सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र
के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां
इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके
बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर
और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा
में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के
प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से
प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं.
सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती
में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी
सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की
सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक
रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा
किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी
कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की
खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों
के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को
अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में
आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब
तक कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से
शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर
क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी
समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के
अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के
अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ
इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के
संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी
की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य
ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार
अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की
उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने
से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं
'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15
अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय
अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से देश के सामने उजागर करने
बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद
हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि
गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन
जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से
मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
--
-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
Help 'RTI Girl' Aishwarya Parashar in achieving 1 Lakh Signature target for the cause of 'Total Gomti Cleaning'
Thanks a lot to all of you who supported Aishwarya's social endeavor.
Aishwarya has sent today's memorandum and has decided to take 1 lakh
signatures and then meet the authorities concerned personally to press
her demand.
We presume that Aishwarya's demands are your demands as well so help
her to reach her target of 1 lakh signatures as soon as possible.
Please take a print of the demand letter, add your demands ( if you
wish ) take signatures and send these to 101, Narayan Tower, F Block,
Rajajipuram, Lucknow-226017, Uttar Pradesh.
Copy of Memo : http://upcpri.blogspot.in/2015/02/help-rti-girl-aishwarya-parashar-in.html
सेवा में,
1-श्री राम नाइक
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
2- श्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
3- श्री अलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
विषय : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य
सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग.
महोदय,
मेरा नाम ऐश्वर्या पाराशर है और मैं कक्षा 8 की छात्रा हूँ. मेरे द्वारा
मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण
नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र
की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए
उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती
में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए
आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए मुझे नगर विकास
विभाग से संपर्क करने को कहा है.
हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम
पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से
लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी.
दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते
हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की
तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के सफ़र के बाद इससे एक सहायक
नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी
जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे
सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का
रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के
किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में स्थित 15 शहर में से
सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग
900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक
कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे
और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता
आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी
प्रदूषित हैं.
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर
मैने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की
सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है
और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा
डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही
नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी कैसे ? मेरे मन में यह सबाल भी
आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो
आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी
स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने
अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया
कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक
कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू
कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित
नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया
कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन
आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई
भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर दिखेगा और गोमती
साफ हो सकेगी.
मेरे साथ साथ भारत के सजग नागरिक आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार
को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी
पार्क में चलने बाले इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग
हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन
करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें
कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी
डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की
माँग कर रहे हैं.
आशा है कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए आप हमारी माँगों को अवश्य पूरा
कर प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का यह अधिकार अवश्य देंगे .
प्रतिलिपि : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ
करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर
प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही
सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित को प्रेषित:
1- श्री प्रणब मुखर्जी
राष्ट्रपति - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत - 110001
2- श्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री-भारत सरकार
नई दिल्ली – 110001
3- सुश्री उमा भारती
मंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
भारत सरकार, नई दिल्ली - 110001
4- श्री राजनाथ सिंह
सांसद - लखनऊ एवं
गृहमंत्री - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत
अत्यधिक अपेक्षाओं सहित सादर प्रेषित -
1- ऐश्वर्या पाराशर,101 नारायण टॉवर,F ब्लॉक ,राजाजीपुरम,लखनऊ.
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-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
Aishwarya has sent today's memorandum and has decided to take 1 lakh
signatures and then meet the authorities concerned personally to press
her demand.
We presume that Aishwarya's demands are your demands as well so help
her to reach her target of 1 lakh signatures as soon as possible.
Please take a print of the demand letter, add your demands ( if you
wish ) take signatures and send these to 101, Narayan Tower, F Block,
Rajajipuram, Lucknow-226017, Uttar Pradesh.
Copy of Memo : http://upcpri.blogspot.in/2015/02/help-rti-girl-aishwarya-parashar-in.html
सेवा में,
1-श्री राम नाइक
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
2- श्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
3- श्री अलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत, पिन कोड -226001
विषय : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य
सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के
क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की
जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को
प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग.
महोदय,
मेरा नाम ऐश्वर्या पाराशर है और मैं कक्षा 8 की छात्रा हूँ. मेरे द्वारा
मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण
नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र
की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए
उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. उत्तर
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती
में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए
आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए मुझे नगर विकास
विभाग से संपर्क करने को कहा है.
हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम
पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से
लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी.
दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते
हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की
तरह बहती है. इसके उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के सफ़र के बाद इससे एक सहायक
नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी
जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे
सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का
रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के
किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में स्थित 15 शहर में से
सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग
900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक
कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे
और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता
आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी
प्रदूषित हैं.
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर
मैने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की
सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है
और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा
डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही
नहीं है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी कैसे ? मेरे मन में यह सबाल भी
आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो
आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी
स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने
अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया
कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक
कि गोमती की सफाई की एक अलग कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू
कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित
नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया
कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन
आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई
भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर दिखेगा और गोमती
साफ हो सकेगी.
मेरे साथ साथ भारत के सजग नागरिक आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार
को लखनऊ के हज़रतगंज मेन क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी
पार्क में चलने बाले इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए 'गोमती नदी
समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग
हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन
करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें
कराकर जाँच रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी
डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की
माँग कर रहे हैं.
आशा है कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए आप हमारी माँगों को अवश्य पूरा
कर प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का यह अधिकार अवश्य देंगे .
प्रतिलिपि : 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ
करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर
प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही
सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित को प्रेषित:
1- श्री प्रणब मुखर्जी
राष्ट्रपति - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत - 110001
2- श्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री-भारत सरकार
नई दिल्ली – 110001
3- सुश्री उमा भारती
मंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण
भारत सरकार, नई दिल्ली - 110001
4- श्री राजनाथ सिंह
सांसद - लखनऊ एवं
गृहमंत्री - भारत सरकार
नई दिल्ली , भारत
अत्यधिक अपेक्षाओं सहित सादर प्रेषित -
1- ऐश्वर्या पाराशर,101 नारायण टॉवर,F ब्लॉक ,राजाजीपुरम,लखनऊ.
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-Sincerely Yours,
Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838
http://upcpri.blogspot.in/
Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.
'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' आरंभ करने की मांग के कक्षा 8 की छात्रा के अभियान की शुरुआत : 1 लाख हस्ताक्षर कर समर्थन जुटाएगी 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर।
Find pictures of signature campaign at http://aishwarya-parashar.blogspot.in/2015/02/rti-girl-kickstarts-signature-campaign.html
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन
क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर जाँच
रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध
कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है . उत्तर प्रदेश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके
उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं
है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक कि गोमती की सफाई की एक अलग
कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं 'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से
देश के सामने उजागर करने बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
Lucknow. 15-02-15. 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर लागू कराने की माँग के लिए आज दिनांक 15 फ़रवरी 2015 दिन रविवार को लखनऊ के हज़रतगंज मेन
क्रॉसिंग / जीपीओ के पास स्थित महात्मा गाँधी पार्क में 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या पाराशर के नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान का सुभारम्भ किया गया जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सेदारी कर ऐश्वर्या की मांगों का समर्थन किया.
इस मौके पर ऐश्वर्या ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यसचिव अलोक रंजन को 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को आरंभ करने, योजना हेतु राज्य सरकार के बजट में अलग हेड बनाकर वित्तीय आवंटन करने, योजना के क्रियान्वयन की सफलता का आंकलन करने हेतु कम से कम 9 स्थानों पर नदी के पानी के प्रदूषण स्तर की जाँचें कराकर जाँच
रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक करने और गोमती नदी में गंदगी डालने को प्रतिवन्धित करने का क़ानून बनाकर उसे कड़ाई से लागू कराने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित किया.
ऐश्वर्या ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को भेजकर 'गोमती नदी समग्र सफाई योजना' को राज्य सरकार के साथ आरंभ करने एवं योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार के स्तर से उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध
कराने संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की है.
लखनऊ के राजाजीपुरम की निवासी ऐश्वर्या पाराशर ने बताया वह कक्षा 8 की छात्रा है. उसके द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय दायर एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में दिए गये जबाब से यह साफ हो रहा है कि चाहें केंद्र की सरकार हो या प्रदेश की सरकार, किसी ने भी गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है . उत्तर प्रदेश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह भी स्वीकारा है कि उनके पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी नहीं है और ये जानकारी लेने के लिए उसे नगर विकास विभाग से संपर्क करने को कहा है .
ऐश्वर्या ने बताया कि हम जानते हैं कि गोमती उत्तर भारत मे बहने वाली एक नदी है. इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटान्डा कसबे में होता है . माधोटान्डा पीलीभीत से लगभग 30 कि. मी. पूर्व में स्थित है. कसबे के मध्य से करीब 1 कि. मी. दक्षिण-पश्चिम में एक ताल है जिसे पन्गैली फुल्हर ताल या गोमत ताल कहते हैं, वही इस नदी का स्रोत्र है . इस ताल से यह नदी मात्र एक पतली धारा की तरह बहती है. इसके
उपरान्त लगभग 20 कि. मी. के सफ़र के बाद इससे एक सहायक नदी गैहाई मिलती है. लगभग 100 कि. मी. के सफ़र के पश्चात यह लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी खीरी तहसील पहुँचती है जहां इसमें सहायक नदियाँ जैसे सुखेता, छोहा तथा आंध्र छोहा मिलती हैं और इसके बाद यह एक पूर्ण नदी का रूप ले लेती है. लखनऊ, लखीमपुर खेरी, सुल्तानपुर और जौनपुर शहर गोमती के किनारे पर स्थित हैं और इसके जलग्रहण क्षेत्र में
स्थित 15 शहर में से सबसे प्रमुख हैं . नदी की लम्बाई उद्गम से लेकर गंगा में समावेश तक लगभग 900 कि. मी. (किलोमीटर) है. गोमती में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक कचरे और चीनी कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं से प्रवाह और घरेलू कचरे और बस्तियों से निकले सीवेज़ और पानी हैं. सई,कथिना,सरायन,छोहा, सुखेता आदि भी गोमती की सहायक नदियां हैं. गोमती में मिलने बाली ये नदियाँ भी प्रदूषित हैं.
ऐश्वर्या बताती है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गयी सूचना से व्यथित होकर उसने सोचा कि जब केंद्र की सरकार और प्रदेश की सरकार ने गोमती नदी की सफाई के लिए उत्तर प्रदेश के गठन से अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं किया है और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास गोमती में कूड़ा- कचरा डालने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किये गए आदेशों की जानकारी ही नहीं
है तो आखिर गोमती नदी की सफाई होगी कैसे ?
"मेरे मन में यह सबाल भी आया कि जब आए दिन अख़बारों में गोमती सफाई की खबरें छपती रहती हैं तो आख़िर ऐसा क्यों है कि इतने प्रयासों और रुपयों के खर्चे के बाद भी स्थिति और भी बदतर होती जा रही है. जब मैने इस सब को अपने अध्यापकों,मित्रों और परिवारजनों से डिसकस किया तो मुझे यह समझ में आया कि इस तरह टुकड़ों में सफाई करने से संसाधन व्यर्थ जाते रहेंगे और जब तक कि गोमती की सफाई की एक अलग
कार्य-योजना बनाकर योजना को पीलीभीत से शुरू कर बनारस तक गोमती नदी पर और इसमें मिलने बाली सभी नदियों पर क्रियान्वित नहीं किया जाएगा तब तक गोमती साफ नहीं हो पाएगी. मुझे यह भी समझ में आया कि जब तक एक अलग विशिष्ट कार्य योजना बनाकर इस योजना के अंतर्गत धन आवंटित कर कार्य नहीं किया जाएगा तब तक स्पष्ट जबाबदेही के अभाव में कोई भी परिणाम आने से रहा. जब ऐसा होगा तभी सफाई का असर
दिखेगा और गोमती साफ हो सकेगी." ऐश्वर्या ने कहा.
ऐश्वर्या ने कहा कि उसके साथ साथ भारत के सजग नागरिकों ने आज से आरम्भ इस हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए गोमती नदी की पूर्ण सफाई के संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की है और आशा व्यक्त की कि गोमती नदी की पूर्ण सफाई के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें उसकी माँगों को अवश्य ही पूरा करेंगी और प्रदेशवासियों को स्वच्छ पर्यावरण का उनका अधिकार अवश्य देंगे .
देश में 'आरटीआई बाली लड़की' के नाम से विख्यात ऐश्वर्या महज 8 साल की उम्र में अपनी आरटीआई से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल राजाजीपुरम शाखा के सामने से कूड़ाघर हटवाकर पब्लिक लाइब्रेरी बनबा चुकी हैं. बापू नहीं 'राष्ट्रपिता' ,हॉकी नहीं 'राष्ट्रीय खेल', 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) नहीं 'राष्ट्रीय अवकाश' जैसे कड़वे सच अपनी बिभिन्न आरटीआई से
देश के सामने उजागर करने बाली इस 'आरटीआई गर्ल' ऐश्वर्या ने बताया कि आज अभियान के आरम्भ के बाद हम यह ज्ञापन सम्बंधित अथॉरिटीज को भेज रहे हैं.ऐश्वर्या ने कहा कि गोमती सफाई के इस अभियान में उनका लक्ष्य 1 लाख हस्ताक्षर कराकर समर्थन जुटाने का है जिसके पूरा होने पर वह इन सभी अथॉरिटीज से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनको अपनी मांगों से अवगत कराएंगी.
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