Thursday, September 12, 2013

Ragging in G. B. Pant Polytechnic Mohan Road Lucknow : Social Welfare Department officials are sleeping

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यहां लड़कियों की तरफ नजर उठाना भी गुनाह

आशीष त्रिपाठी/लखनऊ | अंतिम अपडेट 12 सितंबर 2013 9:32 AM IST पर

सर! यहां सीनियर्स बहुत मारते हैं। हॉस्टल से निकलने में भी डर लगता है।

न जाने कब कोई आकर परेशान करने लगे। क्लास की लड़की से बात तो दूर की बात
है, हम उनकी ओर देख भी नहीं सकते।

इससे तंग होकर कई बच्चे चले गए हैं...घर की स्थिति ठीक नहीं है। पिता जी
ने काफी उम्मीदों से भेजा है। वापस भी नहीं जा सकते... इसलिए झेल रहे
हैं।

ये दर्द है राजधानी के मोहान रोड स्थित जीवी पंत पॉलीटेक्निक के जूनियर
छात्रों का। खौफ का आलम ये है कि वे हॉस्टल से बाहर निकलने में भी घबराते
हैं।

यहां इस वर्ष करीब 120 छात्रों ने एडमिशन लिया है। समाज कल्याण विभाग की
ओर से संचालित इस एक मात्र पॉलीटेक्निक संस्थान में 70 प्रतिशत सीटें
एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

अन्य 15 प्रतिशत पर ओबीसी और 15 पर सामान्य वर्ग के दाखिले होते हैं।
एससी-एसटी वर्ग के छात्रों के लिए हॉस्टल की भी व्यवस्था है। अंबेडकर
हॉस्टल में फर्स्ट ईयर और सिद्धार्थ में सेकंड व थर्ड ईयर के छात्र रहते
हैं।

एक ही परिसर में हॉस्टल होने के कारण जूनियर्स रैगिंग की मार झेलने के
लिए मजबूर हैं। एक छात्र की मानें तो हॉस्टल से बाहर निकलने से पहले
सीनियर्स से परमिशन लेनी पड़ती है।

सीनियर्स के डर का आलम यह है कि हॉस्टल में फर्स्ट ईयर के 120 छात्रों के
रहने की व्यवस्था के बावजूद मात्र 40-50 छात्र ही पढ़ने आते हैं।

इधर, रैगिंग की तमाम खबरों के बीच कॉलेज प्रशासन की नींद नहीं टूट रही
है। आलम ये है कि मुख्य गेट से लेकर हॉस्टल तक कहीं भी एंटी रैगिंग सेल
का बोर्ड और हेल्पलाइन नंबर नहीं दिखाई दिए।

कॉलेज प्रशासन का दावा है कि एंटी रैगिंग कमेटी बनी हुई है लेकिन उसमें
कौन सदस्य हैं और उनके मोबाइल नंबर क्या हैं, यह हॉस्टल में कहीं भी नहीं
दर्ज हैं।

एंटी रैगिंग समिति काम कर रही है। हॉस्टल में अभी तक एंटी रैगिंग समिति
के सदस्यों के नंबर और अन्य सूचनाएं अंकित नहीं हो पाई हैं। जल्द ही इसे
भी करवा दिया जाएगा। अभी तक रैगिंग का कोई भी मामला सामने नहीं आया
है।-केके श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, जीवी पंत पॉलीटेक्निक

http://www.lucknow.amarujala.com/news/city-news-lkw/ragging-case-in-polytechnic/

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- Urvashi Sharma
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Wednesday, September 11, 2013

Ragging in G. B. Pant Polytechnic Mohan Road Lucknow : Social Welfare Department officials are sleeping

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कूटरचित कागजातों के सहारे जीबी पंत पालीटेक्निक में राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति के आरोपी कार्यशाला अधीक्षक पवन कुमार मिश्र के मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को एसीजेएम ने निरस्त कर दिया

कूटरचित कागजातों के सहारे जीबी पंत पालीटेक्निक में राजपत्रित अधिकारी
के पद पर नियुक्ति के आरोपी कार्यशाला अधीक्षक पवन कुमार मिश्र के मामले
में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को एसीजेएम ने निरस्त कर दिया

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कूटरचित कागजातों के सहारे जीबी पंत पालीटेक्निक में राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति के आरोपी कार्यशाला अधीक्षक पवन कुमार मिश्र के मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को एसीजेएम ने निरस्त कर दिया है

http://epaper.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20130912a_024163008&ileft=-5&itop=455&zoomRatio=292&AN=20130912a_024163008

न्यूज डायरी

पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त

लखनऊ। कूटरचित कागजातों के सहारे जीबी पंत पालीटेक्निक में राजपत्रित
अधिकारी के पद पर नियुक्ति के आरोपी कार्यशाला अधीक्षक पवन कुमार मिश्र
के मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को एसीजेएम ने निरस्त कर दिया है।
इसके साथ ही मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए अगली
सुनवाई की तारीख 23 सितंबर तय की है। इस मामले में काकोरी थाने में
रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद पवन के खिलाफ कोई
सुबूत न मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिसके विरोध में वादिनी उर्वशी
शर्मा ने आपत्ति दाखिल की थी।

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पवन कुमार मिश्रा ने कूटरचित प्रपत्रों के सहारे विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पॉलीटेक्निक के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद कर्मशाला अधीक्षक पर नौकरी पा ली

http://www.instantkhabar.com/lucknow/item/9568-lucknow.html


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पुलिस जांच पर न्यायालय का अविश्वास


पुलिस जांच पर न्यायालय का अविश्वासपुलिस जांच पर न्यायालय का अविश्वास

Written by Editor
Tuesday, 10 September 2013 15:36


लखनऊ: लखनऊ के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जालसाजी से राजपत्रित पद
पर नियुक्ति पाने के एक प्रकरण में मामले के सम्पूर्ण तथ्य,परिस्थितियों
तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन क्रिमिनल मिसलेनियस केस
नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0 द्वारा प्रतिपादित
सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पूनः विवेचना हेतु प्रेषित किया
जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक द्वारा प्रेषित अंतिम
आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश
पारित किया है|

लखनऊ की सामजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश का
समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के हितार्थ मोहान रोड लखनऊ
पर राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पॉलीटेक्निक नमक एक मात्र संस्था का
सञ्चालन वर्ष 1965 से कर रहा है| पवन कुमार मिश्रा ने वर्ष 2000 में
कूटरचित प्रपत्रों के सहारे विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस संस्था
के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद कर्मशाला अधीक्षक पर नौकरी पा ली थी|
प्रकरण संज्ञान में आने पर उर्वशी ने विभागीय अधिकारियों को अनेकों
प्रार्थना पत्र दिए किन्तु समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई
कार्यवाही न किये जाने पर उर्वशी ने पवन कुमार मिश्रा के विरुद्ध कानूनी
कार्यवाही के लिए थाना काकोरी में वर्ष 2008 में प्रार्थना पत्र दिया l
उर्वशी के प्रार्थना पत्र पर थाना काकोरी में पवन कुमार मिश्रा के
विरुद्ध आई० पी० सी ० की धारा 420,467,468 के तहत अपराध संख्या 30/08
की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई|

थाना काकोरी के विवेचक मो० मुजतबा द्वारा विवेचानोपरान्त अंतिम आख्या
न्यायालय में प्रेषित की गयी l अंतिम आख्या के बावत वादिनी को न्यायालय
के द्वारा जरिऐ नोटिस आहूत किया गया| उर्वशी के अपनी आपत्तियां अधिवक्ता
त्रिभुवन कुमार गुप्ता के द्वारा प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र के माध्यम से
न्यायालय के समक्ष रखीं|

न्यायालय ने पुलिस की जांच पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए विवेचक द्वारा
वादिनी का बयान न लिए जाने को गंभीरतापूर्वक लिया और पुलिस जांच पर गंभीर
टिप्पणी करते हुए आदेश में अभिलिखित किया कि "सम्पूर्ण केस डायरी एवं
पत्रावली के परिशीलन से भी स्पस्ट है कि प्रस्तुत मामले में दाखिल
अभिलेखीय एवं मौखिक साक्ष्य के आधार पर तथ्यों को साक्ष्य के माध्यम से
साबित किया जा सकता है | "

पुलिस पर अविश्वास जताते हुए न्यायालय ने मामले के सम्पूर्ण
तथ्य,परिस्थितियों तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन
क्रिमिनल मिसलेनियस केस नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0
द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पुनर विवेचना
हेतु प्रेषित किया जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक
द्वारा प्रेषित अंतिम आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप
में दर्ज करने का आदेश पारित किया है और परिवादिनी को बयान हेतु 23-09-13
को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है l

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Court cancels final report of Lucknow police in a case involving fraud by Workshop Superintendent Pawan Kumar Mishra of Government Govind Ballabh Pant Polytechnic of Uttar Pradesh Samaj Kalyan : instantkhabar

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Written by Editor
Tuesday, 10 September 2013 15:36


लखनऊ: लखनऊ के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जालसाजी से राजपत्रित पद
पर नियुक्ति पाने के एक प्रकरण में मामले के सम्पूर्ण तथ्य,परिस्थितियों
तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन क्रिमिनल मिसलेनियस केस
नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0 द्वारा प्रतिपादित
सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पूनः विवेचना हेतु प्रेषित किया
जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक द्वारा प्रेषित अंतिम
आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश
पारित किया है|

लखनऊ की सामजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश का
समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के हितार्थ मोहान रोड लखनऊ
पर राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पॉलीटेक्निक नमक एक मात्र संस्था का
सञ्चालन वर्ष 1965 से कर रहा है| पवन कुमार मिश्रा ने वर्ष 2000 में
कूटरचित प्रपत्रों के सहारे विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस संस्था
के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद कर्मशाला अधीक्षक पर नौकरी पा ली थी|
प्रकरण संज्ञान में आने पर उर्वशी ने विभागीय अधिकारियों को अनेकों
प्रार्थना पत्र दिए किन्तु समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई
कार्यवाही न किये जाने पर उर्वशी ने पवन कुमार मिश्रा के विरुद्ध कानूनी
कार्यवाही के लिए थाना काकोरी में वर्ष 2008 में प्रार्थना पत्र दिया l
उर्वशी के प्रार्थना पत्र पर थाना काकोरी में पवन कुमार मिश्रा के
विरुद्ध आई० पी० सी ० की धारा 420,467,468 के तहत अपराध संख्या 30/08
की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई|

थाना काकोरी के विवेचक मो० मुजतबा द्वारा विवेचानोपरान्त अंतिम आख्या
न्यायालय में प्रेषित की गयी l अंतिम आख्या के बावत वादिनी को न्यायालय
के द्वारा जरिऐ नोटिस आहूत किया गया| उर्वशी के अपनी आपत्तियां अधिवक्ता
त्रिभुवन कुमार गुप्ता के द्वारा प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र के माध्यम से
न्यायालय के समक्ष रखीं|

न्यायालय ने पुलिस की जांच पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए विवेचक द्वारा
वादिनी का बयान न लिए जाने को गंभीरतापूर्वक लिया और पुलिस जांच पर गंभीर
टिप्पणी करते हुए आदेश में अभिलिखित किया कि "सम्पूर्ण केस डायरी एवं
पत्रावली के परिशीलन से भी स्पस्ट है कि प्रस्तुत मामले में दाखिल
अभिलेखीय एवं मौखिक साक्ष्य के आधार पर तथ्यों को साक्ष्य के माध्यम से
साबित किया जा सकता है | "

पुलिस पर अविश्वास जताते हुए न्यायालय ने मामले के सम्पूर्ण
तथ्य,परिस्थितियों तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन
क्रिमिनल मिसलेनियस केस नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0
द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पुनर विवेचना
हेतु प्रेषित किया जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक
द्वारा प्रेषित अंतिम आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप
में दर्ज करने का आदेश पारित किया है और परिवादिनी को बयान हेतु 23-09-13
को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है l

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लखनऊ: लखनऊ के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जालसाजी से राजपत्रित पद
पर नियुक्ति पाने के एक प्रकरण में मामले के सम्पूर्ण तथ्य,परिस्थितियों
तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन क्रिमिनल मिसलेनियस केस
नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0 द्वारा प्रतिपादित
सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पूनः विवेचना हेतु प्रेषित किया
जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक द्वारा प्रेषित अंतिम
आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश
पारित किया है|

लखनऊ की सामजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश का
समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के हितार्थ मोहान रोड लखनऊ
पर राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पॉलीटेक्निक नमक एक मात्र संस्था का
सञ्चालन वर्ष 1965 से कर रहा है| पवन कुमार मिश्रा ने वर्ष 2000 में
कूटरचित प्रपत्रों के सहारे विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस संस्था
के द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पद कर्मशाला अधीक्षक पर नौकरी पा ली थी|
प्रकरण संज्ञान में आने पर उर्वशी ने विभागीय अधिकारियों को अनेकों
प्रार्थना पत्र दिए किन्तु समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई
कार्यवाही न किये जाने पर उर्वशी ने पवन कुमार मिश्रा के विरुद्ध कानूनी
कार्यवाही के लिए थाना काकोरी में वर्ष 2008 में प्रार्थना पत्र दिया l
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विरुद्ध आई० पी० सी ० की धारा 420,467,468 के तहत अपराध संख्या 30/08
की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई|

थाना काकोरी के विवेचक मो० मुजतबा द्वारा विवेचानोपरान्त अंतिम आख्या
न्यायालय में प्रेषित की गयी l अंतिम आख्या के बावत वादिनी को न्यायालय
के द्वारा जरिऐ नोटिस आहूत किया गया| उर्वशी के अपनी आपत्तियां अधिवक्ता
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वादिनी का बयान न लिए जाने को गंभीरतापूर्वक लिया और पुलिस जांच पर गंभीर
टिप्पणी करते हुए आदेश में अभिलिखित किया कि "सम्पूर्ण केस डायरी एवं
पत्रावली के परिशीलन से भी स्पस्ट है कि प्रस्तुत मामले में दाखिल
अभिलेखीय एवं मौखिक साक्ष्य के आधार पर तथ्यों को साक्ष्य के माध्यम से
साबित किया जा सकता है | "

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तथ्य,परिस्थितियों तथा उच्च न्यायालय इलाहबाद द्वारा न्याय निर्णयन
क्रिमिनल मिसलेनियस केस नंबर 9297/07 सुखवासी बनाम स्टेट ऑफ़ यू0 पी0
द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को द्रष्टिगत रखते हुए मामले को पुनर विवेचना
हेतु प्रेषित किया जाना उचित नहीं मानते हुए थाना कारोरी के विवेचक
द्वारा प्रेषित अंतिम आख्या को निरस्त करने और मामले को परिवाद के रूप
में दर्ज करने का आदेश पारित किया है और परिवादिनी को बयान हेतु 23-09-13
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